अंक समूह द्वारा ‘बीवियों का मदरसा’ नाटक का मंचन- शारीरिक फार्स कॉमेडी का ज़िम्मेदाराना उपयोग

कहते हैं कि किसी भी चीज की अति बुरी होती है। पर हर नियम के कुछ अपवाद होते हैं। फार्स

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अंक नाट्य समूह की प्रस्तुति ‘अंजी’- एक सहज लड़की की असहज करने वाली कहानी

आगरा के सूरसदन सभागार में लोग बैठे हुए हैं। थोड़ी हलचल है। कुछ बातचीत है। सब दिनेश ठाकुर मेमोरियल नाट्य

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शतरंज के खिलाड़ी में सामंतवाद और रीतिकालीन साहित्य के अवसान का आभास

किसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी को गहराई से समझने के लिए, उसके देशकाल, वातावरण, और उद्देश्य से अवगत होना आवश्यक है।

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फणीश्वरनाथ रेणू की ‘पंचलाइट’ का रंगलोक द्वारा मंचन: ग्रामीण और आंचलिक परिवेश से साक्षात्कार कराती प्रस्तुति

आधुनिक मुख्य-धारा मनोरंजन और कलात्मक अभिव्यक्ति के संसार से ग्रामीण परिवेश गायब होता जा रहा है, इस बात से शायद

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साहित्य, सिनेमा और अनुरूपण: शेक्सपियर के ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ पर आधारित गुलज़ार द्वारा निर्देशित ‘अंगूर’

हिंदी सिनेमा का साहित्य से रिश्ता बहुत गहरा तो नही है पर  शेक्सपियर की कहानियों को हिंदी निर्देशकों ने बहुत

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