फणीश्वरनाथ रेणू की ‘पंचलाइट’ का रंगलोक द्वारा मंचन: ग्रामीण और आंचलिक परिवेश से साक्षात्कार कराती प्रस्तुति

आधुनिक मुख्य-धारा मनोरंजन और कलात्मक अभिव्यक्ति के संसार से ग्रामीण परिवेश गायब होता जा रहा है, इस बात से शायद

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साहित्य, सिनेमा और अनुरूपण: शेक्सपियर के ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ पर आधारित गुलज़ार द्वारा निर्देशित ‘अंगूर’

हिंदी सिनेमा का साहित्य से रिश्ता बहुत गहरा तो नही है पर  शेक्सपियर की कहानियों को हिंदी निर्देशकों ने बहुत

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मीरा के जीवन पर रंगलोक द्वारा भव्य और समावेशी नृत्य नाटिका

  भक्तिकाल के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों और रचनाकारों की बात करें तो मीरा का नाम लेना स्वाभाविक भी है पर साथ

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आगरा पुस्तक मेला २०१८- साहित्य से परिचय का उत्तम अवसर

हो सकता है कि अलग-अलग शोध में हिन्दुस्तान में किताबों के पढ़ने के चलन के बारे में अलग-अलग नतीजे निकले

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विभाजन की त्रासदी से रूबरू कराता ‘जिस लाहौर नई वेखया, ओ जमिया ही नई’ नाटक का रंगलोक द्वारा मंचन

  भारत–पाकिस्तान का विभाजन एक ऐसी मानव–निर्मित त्रासदी है जिसने इतिहास के सबसे बड़े मानव–विस्थापनों में से एक को जन्म

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