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पीपुल्स लाइब्रेरिया- मात्र पुस्तकालय नहीं पर एक बौद्धिक-सांस्कृतिक 'स्पेस'

आगराशहरमें लगातार शुरु हो रहे नए बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रयोगों में एक और नाम जुड़ गया है। यह है न्यू आगरा क्षेत्र के इंद्रपुरी कॉलोनी में स्थित ‘पीपुल्स लाइब्रेरिया’ नामक पुस्तकालय जो इसी वर्ष के जुलाई महीने में शुरु हुआ है।
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'सिटीज़ ऑफ़ स्लीप' (2015): नींद का सामाजिक-आर्थिक गणित

गरीबी को कई चश्मों से देखा जाता रहा है। पहले इसे भौतिक वस्तुओं के अभाव में देखा जाता था। अमर्त्य सेन और जॉन द्रे जैसे समाज-शास्त्रियों ने जब से आर्थिक-विकास के बजाय मानव-विकास को तरजीह देना शुरु किया तब से इसे मानव क्षमताओं के अभाव के रूप में देखा जाने लगा। इन क्षमताओं को भी इस आधार पर आँका जाता है कि क्या इनके द्वारा हर मनुष्य अपने मन चाहे रूप में अपना पूर्ण विकास कर सकता है या नहीं। इस नए बदलाव से गरीबी की और व्यापक परिभाषा लोगों के समक्ष प्रस्तुत हुई है जिससे खास कर विकासशील और अविकसित कहे जाने वाले और कई मायनों में विकसित देशों में भी गरीबी को कई नए रूपों में समझा जाने लगा है।
खास बात यह है कि किसी भी नए बदलाव से पुरानी सोच में तो परिवर्तन आता ही है, पर साथ ही नित नई परिभाषाओं को गढ़ने और महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनैतिक विषयों को और भी नए रूपों में देख पाने की संभावनाएँ भी बढ़ जाती हैं। ऐसी ही गरीबी की एक नई संभावना और परिभाषा को तलाशती हुई डॉक्यूमेंट्री है ‘सिटीज़ ऑफ़ स्लीप’/ ‘नींद शहर’। शौनक सेन द्वारा निर्देशित यह फिल्म 2015 में बनी और देश-विदेश में कई जगहों पर दिखाई और सराही गई। हाल ही…

Book Review: Journalism through RTI

For more than twelve years now, Right to Information (RTI) act 2005 has been making a big splash in various socio-political scenarios in India. From activism to advocacy, peoples’ movements to individualistic assertion of rights, legal profession to research, RTI act has impacted the culture of accountability, transparency and rights in a big way. However, one area where RTI act was expected to make a big difference but somehow didn’t so much was journalism. Journalism as the profession of collecting and disseminating information was naturally predisposed to exploit this act which has significantly altered the access to information in the country. Never before has there been a single source of authentic and verified information available to people, especially journalists.
It is not as though journalists have not used RTI act but the trend of them using the act for their own stories is relatively very deficient when compared to media covering stories being broken due to the act being …

नाट्य अभिव्यक्ति को नए आयाम देती रंगलोक की साहसिक प्रस्तुति- ‘कोर्ट मार्शल’

कलाकेक्षेत्रमेंएकशब्दजिसकाअकसरप्रयोगकियाजाताहै, वहहैपैथोस।कलात्मकअभिव्यक्तियोंकेलिएइसशब्दकाप्रयोगप्रस्तुतिकीऐसीविशेषताकावर्णनकरनेकेलिएहोताहैजिससेकलाकोग्रहणकरनेवालेकेमनकी

A History of the Old City of Agra- Experience of a Heritage Walk

History is tricky. We live through it, making our little impressions upon it, eroding it and yet preserving it in some ways. At the same time, we wish to consume it by observing it, recording it and experiencing it. The two are not mutually exclusive and yet are not completely in congruence. Nevertheless, some people manage to bring the two aspects together in a wonderful synchronisation.
This past Sunday, in the early hours of the morning, a few aficionados of photography, some connoisseurs of art and culture and a few of those who are interested in history assembled in one of the by-lanes of the old Agra city (built and developed during the medieval period, Mughal period to be more precise) for a unique experience of a heritage walk. Led by Tahir Ahmed Qureshi, a filmmaker based in Agra, who also happens to live in this part of the city, the walk was a guided tour of the old Agra city, walled amidst such iconic monuments as the Agra fort and the Jama Masjid.
With little bits of hi…