फणीश्वरनाथ रेणू की ‘पंचलाइट’ का रंगलोक द्वारा मंचन: ग्रामीण और आंचलिक परिवेश से साक्षात्कार कराती प्रस्तुति

आधुनिक मुख्य-धारा मनोरंजन और कलात्मक अभिव्यक्ति के संसार से ग्रामीण परिवेश गायब होता जा रहा है, इस बात से शायद

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साहित्य, सिनेमा और अनुरूपण: शेक्सपियर के ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ पर आधारित गुलज़ार द्वारा निर्देशित ‘अंगूर’

हिंदी सिनेमा का साहित्य से रिश्ता बहुत गहरा तो नही है पर  शेक्सपियर की कहानियों को हिंदी निर्देशकों ने बहुत

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रंगलोक नाट्य कोलाज का 'आधे अधूरे' की प्रस्तुति के साथ सफल समापन

साभार: मुदित चतुर्वेदी   जीवन में छोटी–बड़ी गतिविधियों के बीच भी हम सभी के सिर पर कुछ ऐसे सवाल मंडराते

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रंगलोक सांस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित 'नाट्य कोलाज' का आगाज़

हम बिहार से चुनाव लड़ रहे हैं समय और युग के परिवर्तन के बावजूद प्रासंगिक रहने वाली साहित्यिक कृतियाँ एक

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रंगलोक द्वारा 'ताजमहल का टेंडर' की प्रस्तुति: कटाक्ष और हास्य का ज़िम्मेदार उपयोग

  कटाक्ष और व्यंग्य को अकसर मात्रहास्य से जोड़कर देखा जाताहै। पर इस विधाको केवल इस रूप मेंदेखना एक सीमित नज़रिया का

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