समीक्षा

Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिनाट्यकलासमीक्षा

रंगलोक नाट्य महोत्स्व 2019- ‘तानसेन’ की एक अद्भुत बहुआयामी प्रस्तुति

अभिव्यक्ति की कोई भी विधा हो, एक विषय जिस पर बहुत सी रचनाएँ रचित की जाती हैं वह है किसी

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिनाट्यकलासमीक्षा

ऐन्टोन चेखोव की कहानियों का प्रिज़्म समूह द्वारा मंचन-फिज़िकल ह्युमर का सफल उपयोग

फिज़िकल कॉमेडी यानी शारीरिक हास्य, हास्य अभिनय का एक महत्वपूर्ण अंग है। पर सभी कलाकार इस प्रकार के अभिनय को

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लुबना सलीम की ‘गुड़म्बा’ नाटक में एकल प्रस्तुति- एक लघु समीक्षा

मशहूर लेखक ज़ावेद सिद्दीकी द्व्रारा लिखित तथा सलीम आरिफ़ द्वारा निर्देशित संवेदनशील एकल नाटक ‘गुड़म्बा’, 27 जुलाई को सूरसदन प्रेक्षागृह

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिनाट्यकलासमीक्षा

भीड़ की चुप्पी की संस्कृति को रेखांकित करते नाटक ‘बकरी’ का रंगलोक द्वारा मंचन

भीड़ का भी अपना एक समाजशास्त्र होता है। सामाजिक मनोविश्लेषण में भीड़ की मानसिकता का अकसर उल्लेख किया जाता है।

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिनिबंधविश्लेषणसमीक्षा

जयशंकर प्रसाद के गद्य साहित्य में पद्य और काव्यत्मकता की छाया

जय शंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के एक मूर्धन्य साहित्यकार हैं जिन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक तथा निबन्ध सभी विधाओं में रचना

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिविश्लेषणसमीक्षा

साहित्य के फिल्मों में अनुरूपण की चुनौतियाँ: ‘शतरंज के खिलाड़ी’ और ‘चोखेर बाली’ का मूल्यांकन

फ़िल्मों की साहित्य पर निर्भरता हमेशा से रही है। बीसवीं सदी के अंत में जब फिल्मों के माध्यम का उदय

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिटेलिविजननिबंधसमीक्षा

धारावाहिक ‘छोटी सी आशा’ में काव्य का दुर्लभ यथार्थवादी प्रयोग

मौजूदा हिन्दी धारावाहिकों में जहाँ कथावस्तु और कहानी में किसी प्रकार की नवीनता या रचनात्मकता की संभावना लगभग समाप्त कर

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