फणीश्वरनाथ रेणू की ‘पंचलाइट’ का रंगलोक द्वारा मंचन: ग्रामीण और आंचलिक परिवेश से साक्षात्कार कराती प्रस्तुति

आधुनिक मुख्य-धारा मनोरंजन और कलात्मक अभिव्यक्ति के संसार से ग्रामीण परिवेश गायब होता जा रहा है, इस बात से शायद

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मीरा के जीवन पर रंगलोक द्वारा भव्य और समावेशी नृत्य नाटिका

  भक्तिकाल के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों और रचनाकारों की बात करें तो मीरा का नाम लेना स्वाभाविक भी है पर साथ

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विभाजन की त्रासदी से रूबरू कराता 'जिस लाहौर नई वेखया, ओ जमिया ही नई' नाटक का रंगलोक द्वारा मंचन

  भारत–पाकिस्तान का विभाजन एक ऐसी मानव–निर्मित त्रासदी है जिसने इतिहास के सबसे बड़े मानव–विस्थापनों में से एक को जन्म

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रंगलोक नाट्य कोलाज का 'आधे अधूरे' की प्रस्तुति के साथ सफल समापन

साभार: मुदित चतुर्वेदी   जीवन में छोटी–बड़ी गतिविधियों के बीच भी हम सभी के सिर पर कुछ ऐसे सवाल मंडराते

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रंगलोक सांस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित 'नाट्य कोलाज' का आगाज़

हम बिहार से चुनाव लड़ रहे हैं समय और युग के परिवर्तन के बावजूद प्रासंगिक रहने वाली साहित्यिक कृतियाँ एक

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