उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक पाठ्य विषय: महत्व और वस्तुस्थिति।

प्रस्तावना: हिन्दुस्तान के कई शहरों में उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक पाठ्य विषयों का विकल्प छात्र-छात्राओं के लिए मौजूद नही है। पर इस स्थिति पर एक समग्र विश्लेषणात्मक शोध की भारी कमी है।विज्ञान, वाणिज्य, कला या अन्य विषय समूह से चुने गए विषय ही निर्धारित करते हैं कि विद्यार्थी आगे जा कर किस क्षेत्र में काम करेगा पर साथ ही यह भी कि उसका सामाजिक और राजनैतिक दृष्टिकोण क्या होगा। इसलिए सामाजिक पाठ्यक्रम को मिलने वाली चुनौतियों के मद्देनज़र उच्च माध्यमिक स्तर पर ध्यान देना अति आवश्यक है।

-सुमित चतुर्वेदी

 

सामाजिक पाठ्य विषयों की मौजूदा स्थिति ठीक नही है। राजनैतिक दखलंदाज़ी हो या फ़िर इन विषयों के प्रति समाज और सरकारों की उदासीनता, सामाजिक पाठ्य विषयों पर तुरंत ध्यान देना बहुत ज़रूरी हो चुका है। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक पाठ्य पुस्तकों में होने वाली गड़बड़ियाँ और योजनाबद्ध तरीके से शामिल की गईं असंगतियाँ इस समस्या का एक पहलू है जिस पर आम मीडिया-चर्चा के अतिरिक्त अमर्त्य सेन जैसे बुद्धिजीवियों ने भी प्रकाश डाला है। दूसरा पहलू जो समान रूप से महत्वपूर्ण है वह है सामाजिक विषयों की उच्च माध्यमिक स्तर पर बढ़ती अनुपलब्धता। जहाँ पाठ्य पुस्तकों में हुई गलतियों और असंगतियों पर फ़ौरी तौर पर ध्यान दिया जाता है वहीं अनुपलब्धता की यह समस्या संगठनात्मक और निरन्तर है जिसे सिर्फ़ एकबारगी के प्रयास से नही सुलझाया जा सकता है।

हिन्दुस्तान के कई शहरों में उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक पाठ्य विषयों का विकल्प छात्र-छात्राओं के लिए मौजूद नही है। पर इस स्थिति पर एक समग्र विश्लेषणात्मक शोध की भारी कमी है। कुछ अखबारों में समय समय पर इक्का दुक्का विद्यार्थियों की इस समस्या पर अखबारों में छपने वाली खबरों से स्थायी निदान की संभावना कम है।

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6 thoughts on “उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक पाठ्य विषय: महत्व और वस्तुस्थिति।

  • March 25, 2014 at 2:27 pm
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    राजनैतिक, सामाजिक ,आर्थिक ,वैज्ञानिक किसी भी विषय पर बात करने से पहले हमें अपने समाज से जुड़ना आवश्यक है। समाज से जुड़ने के लिए सामाजिक विषयों का ज्ञान होना भी जरूरी है। उच्च माध्यमिक विद्यालयों में सामाजिक विषय इस सन्दर्भ में आवश्यक है यही इस लेख से प्रदर्शित होता है। आज घर -बाहर ,रास्ते-चौराहों टेलीविजन अखबारों में अधूरे ज्ञान के साथ परिचर्चाएँ होती रहती हैं उन्हें इससे सही राह मिलेगी।

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  • March 25, 2014 at 2:35 pm
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    लेख का अभिप्राय समझने के लिए शुक्रिया। यह सारांश लेख की प्रस्तावना बनने के लायक है। 🙂

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  • March 25, 2014 at 2:57 pm
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    राजनैतिक, सामाजिक ,आर्थिक ,वैज्ञानिक किसी भी विषय पर बात करने से पहले हमें अपने समाज से जुड़ना आवश्यक है। समाज से जुड़ने के लिए सामाजिक विषयों का ज्ञान होना भी जरूरी है। उच्च माध्यमिक विद्यालयों में सामाजिक विषय इस सन्दर्भ में आवश्यक है यही इस लेख से प्रदर्शित होता है। आज घर -बाहर ,रास्ते-चौराहों टेलीविजन अखबारों में अधूरे ज्ञान के साथ परिचर्चाएँ होती रहती हैं उन्हें इससे सही राह मिलेगी।

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  • March 25, 2014 at 3:05 pm
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    लेख का अभिप्राय समझने के लिए शुक्रिया। यह सारांश लेख की प्रस्तावना बनने के लायक है। 🙂

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