Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिटेलिविजननिबंध

हिन्दी धारावाहिकों पर आलोचनात्मक पत्रकारिता का अभाव

दोपहर के एक या दो बजे के समय अगर आप कोई भी जाना-माना हिन्दी समाचार चैनल (एक दो को छोड़कर)

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिनाट्यकलासमीक्षा

भीड़ की चुप्पी की संस्कृति को रेखांकित करते नाटक ‘बकरी’ का रंगलोक द्वारा मंचन

भीड़ का भी अपना एक समाजशास्त्र होता है। सामाजिक मनोविश्लेषण में भीड़ की मानसिकता का अकसर उल्लेख किया जाता है।

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिनिबंधविश्लेषणसमीक्षा

जयशंकर प्रसाद के गद्य साहित्य में पद्य और काव्यत्मकता की छाया

जय शंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के एक मूर्धन्य साहित्यकार हैं जिन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक तथा निबन्ध सभी विधाओं में रचना

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिविश्लेषणसमीक्षा

साहित्य के फिल्मों में अनुरूपण की चुनौतियाँ: ‘शतरंज के खिलाड़ी’ और ‘चोखेर बाली’ का मूल्यांकन

फ़िल्मों की साहित्य पर निर्भरता हमेशा से रही है। बीसवीं सदी के अंत में जब फिल्मों के माध्यम का उदय

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Archive Subscriptionइतिहास और समाजकला, साहित्य और संस्कृतिनिबंधविश्लेषण

फिल्मों के विदाई के गीतों में महिलाओं की असहायता का महिमामंडन

एक लड़की के विवाह से ही ‘विदा’ शब्द जुड़ा होता है क्योंकि उसके जीवन में अपने घर से जिस तरह

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