आगरा

Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिसमीक्षा

विभाजन की त्रासदी से रूबरू कराता ‘जिस लाहौर नई वेखया, ओ जमिया ही नई’ नाटक का रंगलोक द्वारा मंचन

  भारत–पाकिस्तान का विभाजन एक ऐसी मानव–निर्मित त्रासदी है जिसने इतिहास के सबसे बड़े मानव–विस्थापनों में से एक को जन्म

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिरिपोर्ट

स्मरण प्रेमचंद- 17 संगोष्ठी, आगरा: पत्रकारिता की विरासत और प्रेमचंद

​ प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष में उनकी जन्म वर्षगांठ 31 जुलाई को आरम्भ हुए एक माह तक चलने वाले,

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिसमीक्षा

प्रयोगात्मक नाट्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण: रंगलोक द्वारा ‘वनमाखी’ की प्रस्तुति

वनमाखी में गरिमा मिश्रा (साभार: रंगलोक सांस्कृतिक संस्थान) सूरसदन सभागर के तल में बने छोटे से मंच पर शनिवार शाम

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिनिबंध

आगरा शहर के बनते बिगड़ते सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल

हाल ही में आगरा में स्थित मेहर टॉकीज़ (जो कि एक सिंगल स्क्रीन सिनेमा है) में एक फिल्म देखी तो

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिसमीक्षा

‘पंछी ऐसे आते हैं’: रंगलोक द्वारा संजीदगी और हास्य लिए संतुलित मंचन

जहाँ बड़े शहरों में नाटकों का मंचन वाणिज्यिक और गैर-वाणिज्यिक रूप से निरन्तर होता रहता है, वहीं छोटे शहरों में

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Archive Subscriptionनिबंधराजनीति, नीति और शासनविश्लेषण

आगरा शहर में सवा घंटे से ऊपर साइकिल चलाना हो सकता है घातक

साइकिल यातायात को बेहतर स्वास्थ्य के लिए भले ही आवश्यक माना जाता हो पर अंतराष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक

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Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिसमीक्षा

जब रंगलोक ने आगरा को मंटो से मिलाया

बैकुण्ठी देवी कन्या महाविद्यालय में ‘अरे भाई मंटो!’ का मंचन आगरा में लगभग एक दशक से स्थापित हो चुके थिएटर

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