Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिसमीक्षा

रंगलोक सांस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित 'नाट्य कोलाज' का आगाज़

हम बिहार से चुनाव लड़ रहे हैं समय और युग के परिवर्तन के बावजूद प्रासंगिक रहने वाली साहित्यिक कृतियाँ एक

Read More
Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिसमीक्षा

रंगलोक द्वारा ‘ताजमहल का टेंडर’ की प्रस्तुति: कटाक्ष और हास्य का ज़िम्मेदार उपयोग

कटाक्ष और व्यंग्य को अकसर मात्रहास्य से जोड़कर देखा जाताहै। पर इस विधाको केवल इस रूप मेंदेखना एक सीमित नज़रिया का परिचायकहै।

Read More
Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिनिबंध

पीपुल्स लाइब्रेरिया- मात्र पुस्तकालय नहीं पर एक बौद्धिक-सांस्कृतिक स्पेस

 साभार: पीपुल्स लाइब्रेरिया आगरा शहर में लगातार शुरु हो रहे नए बौद्धिक और सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रयोगों में एक और

Read More
Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिसमीक्षा

‘सिटीज़ ऑफ़ स्लीप’ (2015): नींद का सामाजिक-आर्थिक गणित

गरीबी को कई चश्मों से देखा जाता रहा है। पहले इसे भौतिक वस्तुओं के अभाव में देखा जाता था। अमर्त्य

Read More
Archive Subscriptionकला, साहित्य और संस्कृतिसमीक्षा

नाट्य अभिव्यक्ति को नए आयाम देती रंगलोक की साहसिक प्रस्तुति- ‘कोर्ट मार्शल’

कला के क्षेत्र में एक शब्द जिसका अकसर प्रयोग किया जाता है, वह है पैथोस। कलात्मक अभिव्यक्तियों के लिए इस

Read More