Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2012

लोक संस्कृति का जाल।

लोक संस्कृति का जाल।
द्वारा सुमित चतुर्वेदी 

प्रस्तावना: यह कोई बहुत उत्कृष्ट या असाधारण लेख नही है। अपनी ही ज़िन्दगी में हुए कुछ अनुभवों से गुज़रकर कैसे लोक संस्कृति के एक अभिन्न अंग, लोक गीतों, से मेरा साक्षातकार हुआ, और कैसे मैंने समाज को समझने का एक नया नज़रिया पाया, यह लेख सिर्फ़ उस यात्रा का एक साधारण सा वृतान्त है। आशा है आप इससे अपने आपको, समर्थन या विरोध में, चाहे जैसे भी जोड़ कर देख पाएंगे।