जयशंकर प्रसाद के गद्य साहित्य में काव्यात्मकता की छाया और छायावाद
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध साहित्यकार हैं जिन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक तथा निबन्ध सभी विधाओं में रचना की है। छायावादी युग के प्रमुख स्तम्भों जैसे पन्त, निराला तथा महादेवी वर्मा के बीच उनका एक प्रमुख स्थान है। हिंदी साहित्य की गद्य विधा में जहाँ एक तरफ़ प्रेमचंद के यथार्थवादी लेखन का प्रभाव देखने को मिलता था वहीं प्रसाद के गद्य साहित्य में काव्यात्मकता की छाया दिखती थी जो उनके साहित्य को उस दौर में एक अलग पहचान देती थी। प्रस्तुत है जयशंकर प्रसाद के गद्य साहित्य में काव्यात्मकता और छायावाद के प्रभाव पर यह समीक्षा।
अमिता चतुर्वेदी स्वतंत्र लेखिका हैं एवं अपना परिचय नामक ब्लॉग पर लिखती हैं। आप इस लेख को उनके ब्लॉग पर भी पढ़ सकते हैं।
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