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ऐतिहासिक पर्यटन के प्रति हमारा नज़रिया कैसा हो : मैसूर महल पर विशेष

ऐतिहासिकइमारतेंहमारेसमाजके साझा जीवनऔरस्मृतिमेंमीलकेपत्थरकेसमानहोतीहैं।वेबतातीहैंकिसमयकेपथपरकिसस्थानपरकौनसापड़ावआयाथा, तबक्याघटनाएँघटितहुईंथींऔरउनकेक्यानिशानबचेरहगएहैं।परइनइमारतोंकोदेखनेमें हमसे एक भूल हो जाती है। जैसाकिएकअंग्रेज़ीकहावतमेंकहाजाताहैशायदहमजंगलोंकोदेखनेकेबजायसिर्फपेड़ोंकोदेखकररहजातेहैं।यानिइनऐतिहासिकइमारतोंकोदेखतेहुएहमसिर्फ इनके भौतिक रूप को देखते हैं औरइनसेजुड़ेकालखंडऔरउसकेऐतिहासिक-सामाजिकपरिवेशकोदेखनाभूलजातेहैं।
ऐतिहासिकइमारतेंवास्तुकलाकेमद्देनज़रतोमहत्वपूर्णहोतीहीहैंपरयहवास्तुकलासामाजिक-ऐतिहासिकपहलुओं
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मीरा के जीवन पर रंगलोक द्वारा भव्य और समावेशी नृत्य नाटिका

भक्तिकालकेमहत्वपूर्णव्यक्तित्वोंऔररचनाकारोंकीबातकरेंतोमीराकानामलेनास्वाभाविकभीहैपरसाथहीउसश्रृंखलाकेसभीव्यक्तित्वोंमेंउनकानामअलगभीखड़ापायाजाताहै।ऐसाइसलिएकिपहले-पहलतोवहएकस्त्रीथींजबकिउससमयकेबाकी

Retracting Tax Exemption for Sports Coaching and Training Facilities Belies Sporting Ambitions of India

With the new Goods and Services Tax regime still taking roots in the country, its effects continue to be felt in different walks of life. The field of sports has also witnessed some upheavals. Concerns have already been expressed by many sports personalities as well as those engaged in sports businesses regarding the heightened costs of sports equipment because of the newly applicable GST rates. Most sporting equipment witnessed a steep rise in price due to the new GST rates including badminton shuttle cocks, tennis balls and many other sporting essentials.
What is more, GST law has also negatively impacted upon private sporting facilities in India.As per the Notification no. 25/2012 of the now defunct service tax which came into effect on the 20th June 2012, the then Central Government of UPA-II had announced exemption under the section 66B of the service tax act to those who were providing services by way of training or coaching in recreational activities related to arts, culture …

The Struggle for High Court Bench in Agra: A Ball in No one’s Court

For more than three and a half decades now Agra District and Sessions Court has witnessed refusal of work by lawyers on any given Saturday. On 13th March 1982, the Agra Bar association called a Saturday strike, demanding the creation of a bench of the Allahabad high court in Agra. With the demand unmet, the strike continues to be observed every weekend till today.

आगरा पुस्तक मेला २०१८- साहित्य से परिचय का उत्तम अवसर

हो सकता है कि अलग-अलग शोध में हिन्दुस्तान में किताबों के पढ़ने के चलन के बारे में अलग-अलग नतीजे निकले हों पर आम तौर पर बातचीत के माध्यम से जो तस्वीर उभर कर सामने आती है उससे पता चलता है कि हमारे समाज में किताबें पढ़ने का चलन काम हुआ है और किताबों, लेखकों और साहित्य में हमारी रूचि भी। ऐसा शायद इसलिए है कि मनोरंजन और सूचना के लिए नित नए माध्यम अब बेहद आसानी से उपलब्ध होते जा रहे हैं जिनकी सामग्री त्वरित रूप से ग्राह्य हो जाती है जबकि पढ़ने के लिए समय और धैर्य दोनों की आवश्यकता होती है।

ऐसे में कुछ पुराने समय से चली आ रही ऎसी परम्पाराएँ हैं जो किताबों के शौक और शौकीनों के लिए कुछ आस बनाए रखती हैं और संभवत: नए लोगों को भी इस शौक से जोड़ पाने में कामयाब होती हैं। ऎसी ही एक परंपरा है पुस्तक-मेला। एक ही जगह पर कई सारे प्रकाशनों की ढेर सारी दुकानें और कुछ सस्ती और कुछ बहुत सस्ती किताबों को खरीदने के मौके, असल में यही है पुस्तक-मेले का सार। पर इसके अलावा पुस्तक मेला एक ऎसी स्पेस भी तैयार करता है जिसमें शहर के लोग एक साथ आकर किताबों की दुनिया से रूबरू हो पाते हैं। ऐसा ही एक पुस्तक मेला राष्ट्रीय प…