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Showing posts from April, 2017

Team 'Stop Acid Attacks' Looking for Contributions for Corrective Surgeries and Treatments

After 25 years since being attacked by acid as a child, Neetu whose vision was heavily compromised was finally able on Monday to see big objects and shapes. Neetu had undergone this surgery last week at Shankar Netralaya in Chennai. It was found after her surgery that she also has a cataract which is expected to be treated this Wednesday, as informed by Chaanv Foundation, the NGO which runs the campaign called ‘Stop Acid Attacks’ and has facilitated the crowd funding for this treatment. After this procedure it is hoped that she will be able to read and write among other things, “a dream come true for her”.
Neetu is one of many acid attack survivors who have suffered various injuries due to acid attacks committed against them in the past, many of whose vision have been impaired to various degrees as a result. With the help of ‘Stop Acid Attack Campaign’ and Chaanv Foundation’s novel and now internationally popular initiative of cafes run by acid attack survivors in Agra, Lucknow and Ud…

आगरा शहर के बनते बिगड़ते सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल

हाल ही में आगरा में स्थित मेहर टॉकीज़ (जो कि एक सिंगल स्क्रीन सिनेमा है) में एक फिल्म देखी तो आज से लगभग 10 साल पहले का समय याद आ गया, जब इससे पहले आखिरी बार किसी सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल, संजय प्लेस मार्केट में स्थित संजय टॉकीज में प्रदर्शित हृतिक रोशन की फिल्म कृष देखी थी। वो टिकटों के लिए लाइन में लगना, एडवांस बुकिंग के लिए एक दिन पहले या सुबह से टॉकीज़ के चक्कर लगाना, एक बेहद कमज़ोर से कागज की पर्ची पर छपी टिकट और फिर एक पतले से शटर के बीच से होकर फिल्म हॉल में दाखिल होना।
साथ ही खास थीं सिंगल स्क्रीन हॉल की बाहरी और अंदरूनी साज-सज्जा। हर एक हॉल अपने-आप में खास था और शहर में उसकी अलग पहचान हुआ करती थी। आगरा शहर के सिनेमा हॉल की बात करें तो जहाँ अंजना टॉकीज़ उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक संख्या में सीटों वाले वातानुकूलित हॉल में से एक था, वहीं रघुनाथ टॉकीज़ के अंदर बना कृत्रिम झरना जो इंटरवल के दौरान चालू किया जाता था शहर के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा आकर्षण हुआ करता था और वहीं लगभग दो दशक पहले ही अपना पुनर्निमाण करा ज्वाला टॉकीज़ पुराने दौर के सिनेमा हॉल के बीच आधुनिक रंग-रूप वाला एकमात्र हॉ…