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#BYOB (Bring Your Own Book)

Hi Book Lovers!

This is to bring to your kind attention that Opinion तंदूर is planning to start a new reading tradition in Agra called- Bring Your Own Book. Borrowed from a similar idea being beautifully executed in Bangalore, this tradition like a Book Club does not impose a book upon you to read, but lets you bring your own book and share your views, reviews, feelings and experiences about it. You can bring an old favourite that you had read years ago but whose memory never abandons you or it could be a book you are reading presently and still going through the experiences that every book reader goes through while reading a book. After all reading a book is like going on a journey. Then why not allow others to accompany you? And like every thing Opinion तंदूर, this tradition also allows you to pick your own book irrespective of which language it is in. Just bring your book and take us along with you on the journey that reading it is.

If you are willing to participate, send your name, a brief bio and the book you want to share with others to opinion.tandoor@gmail.com or you can go to the Opinion तंदूर facebook page or twitter page and share your interest there.

सभी किताब के शौकीनों को सलाम!

Opinion तंदूर योजना  बना रहा है आगरा में एक नए पढ़ने की परंपरा की शुरुआत करने की जिसका  नाम है Bring Your Own Book. बैंगलोर के एक सफल प्रयोग से प्रेरित यह परम्परा किसी बुक क्लब की तरह आप पर कोई एक किताब नही थोपती है। यहाँ  आपको पूरी आज़ादी है की आप अपनी खुद की किताब लाएँ  और उसके बारे में अपने खुद के विचार, पसंद, नापसंद और अनुभव सबके साथ साझा करें। आप कोई पुरानी किताब, जिसे आपने सालों पहले पढ़ा हो और जिसने आपके मन पर अमिट छाप छोड़ी हो या कोई ऎसी किताब जिसे आप अभी भी पढ़ रहे हों, चुन सकते हैं। आखिरकार किसी किताब को पढ़ना किसी सफर को तय करने जैसा ही है। तो क्यों ना  अपने इस सफर में कुछ हमराही साथ ले चलें? जैसा कि Opinion तंदूर की हर पहल में कोशिश रहती है, यहाँ भी ये कोशिश रहेगी कि भाषा कोई बाधा ना बने इसलिए आपको पूरी स्वतंत्रता है की आप जिस भाषा में चाहें उस भाषा में अपनी किताब चुनें। बस अपने साथ इस सफर में हमें साथ ले जाना ना भूलें।

यदि आप इस कार्यक्रम में भाग लेने के इच्छुक हैं तो opinion.tandoor@gmail.com पर अपना नाम, अपने बारे में एक लाइन और अपनी पसंदीदा किताब का नाम भेज दें, या फिर आप Opinion तंदूर के फेसबुक पेज या ट्विटर पेज पर भी अपनी इच्छा ज़ाहिर कर सकते हैं। 

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उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक पाठ्य विषय: महत्व और वस्तुस्थिति।

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Ranglok Theatre Festival: Putting Agra On The Indian Theatre Map

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हिन्दी एक्शन-फंतासी कॉमिक उपसंस्कृति की यात्रा- इंद्रजाल से लेकर राज कॉमिक्स तक

एक्शन और फंतासी का मिलन एक बेहद शक्तिशाली सांस्कृतिक गठजोड़ है। और अक्सर यह सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण गठजोड़ उपभोक्तावाद के लिए भी बहुमूल्य हो जाता है। हैरी पॉर्टर की उपन्यास श्रंखला के लिए पूरे विश्व में दीवानगी को देख लीजिए या फिर अमेरिका की कॉमिक बुक इंडस्ट्री की आपार सफलता को ही, एक्शन और फंतासी की ताकत का अंदाज़ा आपको लग जाएगा। इस गठजोड़ से हमेशा एक उपसंस्कृति का जन्म होता है जिससे उपजे संसार या फिर बहु-संसारों में बच्चे और युवा रोमांच और आनंद तलाशते हैं।
क्योंकि यह उपसंस्कृति भाषा से निर्मित होती है, इसलिए अलग-अलग भाषाएँ और उनका सामाजिक संदर्भ इन उपसंस्कृतियों का स्वरूप निर्धारित करते हैं। हिन्दी भाषा में आधुनिक समय में पहला एक्शन और फंतासी का गठजोड़, हिन्दी साहित्य के पहले उपन्यासों में से एक, देवकी नंदन खतरी द्वारा रचित ‘चंद्रकांता’ में देखा जा सकता है। तिलिस्म और एक्शन से भरपूर इस उपन्यास में कई ऐसे तत्व थे जिन्होंने इस रचनावली को उस समय में ही नहीं, बल्कि आगे के समय में भी लोगों के लिए रोचक और आकर्षक बनाए रखा।
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