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Showing posts from February, 2018

India Heritage Walk Festival: Soaking in Old Agra City's History

Narratives are an integral part of our lives. As narratives are built, they in turn, build our histories, legacies as well as heritage. With time these narratives get consumed even as they are being continuously formed and re-formed. Their contexts, contours and details change and yet they remain the same in so many ways. In our hurried and busy existences, it may be difficult to witness these changes or these narratives. That’s why every now and then it becomes important to take some time out, take a step back and absorb this ever-evolving history and heritage.
One such opportunity is the ongoing Indian Heritage Walk Festival. Set in different Indian cities, this festival jointly organised by the Sahapedia and Yes Bank is celebrating the heritage of these cities the entire month of February, by organising walks based on different themes, including one in Agra as well. Centuries of history, different rulers and regimes and their architectural and socio-cultural legacies make, the onc…

विभाजन की त्रासदी से रूबरू कराता 'जिस लाहौर नई वेखया, ओ जमिया ही नई' नाटक का रंगलोक द्वारा मंचन

भारत-पाकिस्तान का विभाजन एक ऐसी मानव-निर्मित त्रासदी है जिसने इतिहास के सबसे बड़े मानव-विस्थापनों में से एक को जन्म दिया। जहाँ एक औपनिवेशक महाशक्ति ने बड़ी आसानी से एक वतन के दो टुकड़े कर दो मुल्कों को जन्म दे दिया, वहीं उनके इस कदम से कितने शहर और कितनी ज़िंदगिंयाँ उजड़ गईं इसका आँकड़ों में हिसाब लगा पाना भले ही मुमकिन हो पर इससे पहुँचे मानसिक सदमों और संबंधों को पहुँचे आघातों का हिसाब लगा पाना मुश्किल है। पारस्परिक संबंधों और संवेदनाओं पर हुए विभाजन के असर पर आज तक अमूमन साहित्य में ही ध्यान दिया गया है। हालांकि सामाजिक-राजनीतिक विमर्श भी अब ऐसे साहित्य पर आलोचनात्मक दृष्टि डालने लगे हैं और इसलिए ऐसे साहित्य को एक प्रकार के सामाजिक-राजनीतिक दस्तावेज़ के रूप में देखा जाने लगा है।
प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ असगर वजाहत द्वारा लिखित नाटक ‘जिस लाहौर नई देखिया, ओ जमिया नई’, विभाजन पर आधारित एक ऐसी ही कृति है जो इस त्रासदी के एक शहर और उसके बाशिंदों पर हुए अपरिमेय आघात को वर्णित करने का प्रयास करता है। इस शनिवार को आगरा के रंगलोक सांस्कृतिक संस्थान ने सूरसदन प्रेक्षागृह में इस नाटक का मंचन किया और आगर…