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Showing posts from July, 2016

Time Trumps All- Lessons from the Agra Fort

Photo Essay: As one enters the majestic structure which is called the Agra Fort, one is instantly mesmerised by its grandeur and sheer size and stature. The original red fort of the country, this, was built by Akbar at the peak of his rule in the 16th century. Since then the fort stands strongly on the right bank of Yamuna, a little far away from Taj Mahal, which can be seen from the fort itself.
Agra fort is all what any king or emperor could have wanted to seal their legacy with, for good. It’s huge, palatial, architecturally diverse and also quite political in its make and design. Since the fort was the site for the capital of the Mughal empire during Akbar’s regime it had the provisions of administrative spaces like Deewan-e-Aam, while also being the grand residence for the emperor of India and his family.
But once the feeling of awe and amazement subside, what strikes one the most is what it is today. A monument maintained and conserved by the government of India’s archaeological…

भाजपा की अंबेडकर-स्तुति में वर्ण व्यवस्था का विरोधाभास

2016 में बाबा साहब अंबेडकर की 125वीं वर्षगांठ बहुत ज़ोर-शोर से मनाई गई। इस उत्साह और उत्सव में कई राजनीतिक दलों ने भी भाग लिया। इन दलों में, केन्द्र में सत्तारुढ़, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी शामिल थी। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ही इस दल के कई नेताओं ने अंबेडकर के विचारों की और उनके समाज के लिए उठाए कदमों की दिल खोल कर प्रशंसा की और उन्हें श्रद्धांजलि भी दी। 
भाजपा का अंबेडकर के विचारों से कोई बहुत पुराना रिश्ता नहीं रहा है। अपने उदय के समय से अब तक, भाजपा जिन नेताओं के समर्थन में मुखर रही है, उनमें सरदार वल्लभभाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल शर्मा आदि प्रमुख रहे हैं। ऐसे में अंबेडकर के नाम पर हाल ही में उभरे इस जोश को भाजपा की परंपरागत सोच से अलग ही देखा जा सकता है।
प्रश्न यह है कि क्या भाजपा अंबेडकर की राजनैतिक-सामाजिक सोच और आदर्शों में सच में विश्वास करने लगी है? इस प्रश्न का उत्तर यदि भाजपा से आएगा तो निश्चित ही हाँ होगा। पर असली दुनिया में इन दलों और उनके नेताओं के द्वारा उठाए गए कदम अलग ही साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं।