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Showing posts from March, 2016

Goa- "What's in a time"

Geography and history are only the outlines of any tourist destination. What makes these outlines complete and possibly attractive or unattractive are the colours that are filled into them through the local culture. That is what makes every tourist destination different from the other.

शीरोज़ हैंगऑउट- अपनी आवाज़ की पहचान

हिन्दी फिल्म “किनारा” का बेहद अर्थपूर्ण और लोकप्रिय गाना जिसे प्रसिद्ध गीतकार गुलज़ार ने लिखा है ज़िन्दगी के फलसफे को खूबसूरती से बयान करता है। यह गीत है “नाम गुम जाएगा…”। इसकी पहली चार पंक्तियों में ही गहरी अस्तित्ववादी सोच दिखाई देती है।
“नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा, मेरी आवाज़ ही पहचान है, गर याद रहे”
यहाँ इन्सान की आवाज़ का अभिप्राय उसके शाब्दिक अर्थ से नहीं बल्कि उसके मार्मिक संदर्भ से निकाला जाना चाहिए। इन्सान की आवाज़ है उसके विचार, सोच और भावनाओं का संसार जिससे उसके अस्तित्व की पहचान होती है।
इस मर्म को असली मायनों में जी रहा है आगरा स्थित “शीरोज़ हैंगाआउट”- एक ऐसा कैफ़े जिसे तेज़ाबी हमले झेल चुकीं कुछ साहसी महिलाएँ पिछले एक साल से भी ज़्यादा समय से चला रही हैं। दिल्ली स्थित “छाँव फ़ाउन्डेशन” की पहल से उपजा यह कैफ़े तेज़ाबी हमले को झेल चुकीं महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से पुन: जोड़ने का काम करता है और आमतौर पर जिस प्रकार हमारे समाज में किसी हमले या अत्याचार से पीड़ित व्यक्ति को ही उस पर हुए प्रहार के लिए ज़िम्मेदार ठहराए जाने की सोच व्यापक है, उसे खत्म करने का प्रयास करता है।