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When Scholars Come to Town: 19th UP Political Science Association Convention at Agra

Event: Almost 100 scholars and intellectuals- including professors, doctors and research scholars, 3 days and more than 216 technical sessions make up the 19th edition of the Uttar Pradesh Political Science Association's National Convention and National Seminar being hosted from 4th to 6th December 2015 at Agra College, Agra. The theme of the convention is "Rising India: Domestic and External Opportunities and Challenges". Dr. Arunoday Bajpai informs Opinion तंदूर that the keynote speaker will be Professor Chintamani Mahapatra from Jawaharlal Nehru University. The convention will feature a wide range of discussions in English and Hindi both languages, making it a truly interdisciplinary event, exploring the theme of "Rising India" from all possible vantage points such as Politics, International Relations, Human Rights and Literature among other.

More details of the technical sessions, papers being presented and presenters, schedules and venues can be accessed through Opinion तंदूर by mailing to us at opinion.tandoor@gmail.com. You may also follow this link of Uttar Pradesh Political Science Association to avail this information. Opinion तंदूर will try to cover as much of the convention as possible and attempt to present a comprehensive picture of the event.

लगभग १०० चिंतक और बुद्धिजीवी जिनमें प्रोफ़ेसर, डॉक्टर और शोधार्थी शामिल हैं, ३ दिन और २१६ से ज़्यादा तकनीकी सत्र से संयोजित होगा उत्तर प्रदेश राजनीति विज्ञान परिषद का १९ वां राष्ट्रीय अधिवेशन एवं राष्ट्रीय सेमिनार जो कि संपन्न होगा ४ से ६ दिसंबर २०१५ तक आगरा कॉलेज में। अधिवेशन का विषय उदीयमान भारत : अवसर और चुनौतियों, पर आधारित होगा। आगरा कॉलेज के डॉ. अरुणोदय बाजपेयी ने Opinion तंदूर को बताया कि जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. चिंतामणि महापात्र बीज वक्ता होंगे। अधिवेशन में उदयमान भारत के विषय के विविध आयामों पर हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में, चर्चा होगी और इसे अलग अलग नज़रियों से समझने की कोशिश रहेगी जैसे की राजनीति विज्ञान, अंतराष्ट्रीय राजनीति, साहित्य आदि।

अधिवेशन के बारे में, जैसे कि सत्र, शोध प्रत्र, प्रस्तुतकर्ता, समय सारिणी और आयोजन स्थल आदि की जानकारी के लिए Opinion तंदूर को opinion.tandoor@gmail.com पर मेल करें या फिर उत्तर प्रदेश राजनीति विज्ञान परिषद के लिंक पर जाएं। Opinion तंदूर की यह कोशिश रहेगी इस अधिवेशन को जितना हो सके, कवर करने की और इस आयोजन की एक समग्र तस्वीर प्रस्तुत करने की।   

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उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक पाठ्य विषय: महत्व और वस्तुस्थिति।

प्रस्तावना: हिन्दुस्तान के कई शहरों में उच्च माध्यमिक स्तर पर सामाजिक पाठ्य विषयों का विकल्प छात्र-छात्राओं के लिए मौजूद नही है। पर इस स्थिति पर एक समग्र विश्लेषणात्मक शोध की भारी कमी है।विज्ञान, वाणिज्य, कला या अन्य विषय समूह से चुने गए विषय ही निर्धारित करते हैं कि विद्यार्थी आगे जा कर किस क्षेत्र में काम करेगा पर साथ ही यह भी कि उसका सामाजिक और राजनैतिक दृष्टिकोण क्या होगा। इसलिए सामाजिक पाठ्यक्रम को मिलने वाली चुनौतियों के मद्देनज़र उच्च माध्यमिक स्तर पर ध्यान देना अति आवश्यक है।

Ranglok Theatre Festival: Putting Agra On The Indian Theatre Map

Monsoon perhaps inspires more art than any other season; especially performance art. So, what could be better than a festival of theatre to be held right in the midst of this season. Ranglok Sanskritik Sansthan, one of the most prominent theatre groups in the city of Agra, is bringing a four-day theatre festival to the iconic Sursadan auditorium in Agra this month. To be held from 22nd of July till 25th of July, Ranglok Theatre Festival will feature four plays.

हिन्दी एक्शन-फंतासी कॉमिक उपसंस्कृति की यात्रा- इंद्रजाल से लेकर राज कॉमिक्स तक

एक्शन और फंतासी का मिलन एक बेहद शक्तिशाली सांस्कृतिक गठजोड़ है। और अक्सर यह सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण गठजोड़ उपभोक्तावाद के लिए भी बहुमूल्य हो जाता है। हैरी पॉर्टर की उपन्यास श्रंखला के लिए पूरे विश्व में दीवानगी को देख लीजिए या फिर अमेरिका की कॉमिक बुक इंडस्ट्री की आपार सफलता को ही, एक्शन और फंतासी की ताकत का अंदाज़ा आपको लग जाएगा। इस गठजोड़ से हमेशा एक उपसंस्कृति का जन्म होता है जिससे उपजे संसार या फिर बहु-संसारों में बच्चे और युवा रोमांच और आनंद तलाशते हैं।
क्योंकि यह उपसंस्कृति भाषा से निर्मित होती है, इसलिए अलग-अलग भाषाएँ और उनका सामाजिक संदर्भ इन उपसंस्कृतियों का स्वरूप निर्धारित करते हैं। हिन्दी भाषा में आधुनिक समय में पहला एक्शन और फंतासी का गठजोड़, हिन्दी साहित्य के पहले उपन्यासों में से एक, देवकी नंदन खतरी द्वारा रचित ‘चंद्रकांता’ में देखा जा सकता है। तिलिस्म और एक्शन से भरपूर इस उपन्यास में कई ऐसे तत्व थे जिन्होंने इस रचनावली को उस समय में ही नहीं, बल्कि आगे के समय में भी लोगों के लिए रोचक और आकर्षक बनाए रखा।
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