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Showing posts from April, 2015

असल दुनिया के हैशटैग।

फोटो निबंध: कभी लैंडलाइन वाले फोन के निचले कोने में अलग थलग पड़े रहने वाले, कभी ना काम आने वाले चार लकीरों से बने हैश के अब दिन फिर गए हैं। कभी सही मायनों में हाशिए पर पड़े रहने वाला हैश आज देश और दुनिया की नब्ज़ का हाल बताता है। ये सब हुआ है सोशल मीडिया की क्रांति की बदौलत। आज चाहे आस पड़ौस की खबर जानना पहले जितना ही मुश्किल क्यों ना हो दुनिया के किसी भी देश में चहल पहल की वजह हैशटैग के माध्यम से आराम से पता चल जाती है। हैशटैग कोई नया इजाद तो नहीं है, पर उसका यह प्रयोग एक इजाद ज़रूर है। आजकल राजनीति, मनोरंजन, अर्थ व्यवस्था और बाकि सामाजिक गतिविधियों का एजेंडा हैशटैग से ही निर्धारित होता है।
हैशटैग की इस बदली हुई किस्मत के लिए उसको हार्दिक बधाई। काश सबके दिन ऐसे ही बदलें। सोशल मीडिया की दुनिया में वॉल पर समाज की नब्ज़ भले ही आज पकड़ में आती हों पर असल दुनिया में ये सिलसिला हमेशा से चला आ रहा है। असल दुनिया में दीवारों पर, होर्डिंग पर, बैनर, पर्चों आदि में लोग अपने संदेशों को हमेशा से चर्चित करते आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों असल दुनिया की नब्ज़ पकड़ने की ऎसी ही एक कोशिश के तहत खींची गई कुछ तस्वीरो…

Reading "Everybody loves a good drought".

Book Review: This is not a conventional book review since this is not a conventional book. It is a narrative of an experience of reading this book. Twenty two years since these stories have been reported in the book, they still resonate with what millions go through even today. This write up is thus not just a review but an attempt to introduce those who have not read it yet and give them an opportunity to learn and be enriched from this collection of real stories.