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Showing posts from August, 2014

पोंडीचेरी को समझने की एक नाकाम कोशिश।

पोंडीचेरी या पुडुचेरी के बोलिवार्ड के नक्शे को देखेंगे तो पाएंगे कि लम्बी लम्बी लकीरों से कई सारी छोटी छोटी लकीरें मिलती हैं और हर छोटी लकीर आगे जाकर बंगाल की खाड़ी के किनारे चलने वाली गोर्बे एवेन्यू में जाकर मिल जाती है और कुछ इस तरह सड़कों का एक बहुत ही महीन पर बहुत ही सुलझा हुआ जाल बन जाता है। कुछ ऐसी ही फितरत है यहाँ की औपचारिक और अनौपचारिक संस्कृति की भी। सरकारी इमारतें, सड़कें, स्ट्रीट, कैफ़े, चर्च, बुत आदि को देखकर लगेगा कि कई सारी सभ्यताएँ और उनसे उपजी पहचानें एक दूसरे से विभिन्न मौकों पर मिल रही हैं और एक साझा संस्कृति का जाल बुन रही हैं।