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Showing posts from May, 2013

कहानी ‘धारावाहिकों’ की।

कहानी ‘धारावाहिकों’ की। द्वारा: सुमित चतुर्वेदीप्रस्तावना:धारावाहिक दूरसंचार का एक महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरा माध्यम है पर एक गहन शोध और विचार के बिना यहएक सामाजिक रूप से अपरिपक्व और बौद्धिक रुप से बौना माध्यम बन कर रह सकता है।यह लेख टीवी धारावाहिक के लगभग तीन दशक लम्बे इतिहास की सरंचनात्मक समीक्षा का प्रयास करता है जिससेभारत में धारावाहिकों केसामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों का स्पष्ट चित्रण किया जा सके।